About Mukesh Mishra
From Global Business to Meaningful Music
कुछ यात्राएँ मंज़िल तक पहुँचने के लिए होती हैं, और कुछ यात्राएँ स्वयं को खोजने के लिए। मेरी यात्रा दोनों का संगम है।
पिछले चार दशकों से अधिक समय तक मैंने भारत के केमिकल उद्योग में नेतृत्व की भूमिकाओं में कार्य किया। Commodity और Specialty Chemicals के क्षेत्र में काम करते हुए मुझे 70 से अधिक देशों के साथ व्यापार करने और वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।
लेकिन जीवन की सबसे बड़ी सीख व्यापार से नहीं, अनुभवों से मिली।
कविता लिखने की शुरुआत मैंने किशोरावस्था में की थी। वीर रस, प्रेरणा और मानवीय संवेदनाएँ हमेशा मेरी लेखनी का हिस्सा रहीं। वर्षों तक मेरी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं, पर गीत लेखन मेरी प्राथमिक पहचान नहीं था।
फिर जीवन ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने मेरी लेखनी की दिशा बदल दी।
कुछ महीने पहले मेरी माँ के निधन ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। विशेष रूप से मेरी छोटी बहन उस दुःख से बाहर नहीं निकल पा रही थी। उसी समय मैंने अपनी माँ की अंतिम यात्रा की वास्तविक घटना से प्रेरित होकर एक गीत लिखा—एक ऐसा गीत जो शोक में भी आशा खोजता था। वही मेरा पहला गीत था।
उसके बाद शब्द केवल लिखे नहीं गए, वे गाए जाने लगे।
आज मैं ऐसे गीत लिखता हूँ जो केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की यात्रा के लिए हैं। प्रेम, विरह, अध्यात्म, प्रकृति, साहस, राष्ट्र, जीवन और आत्मचिंतन—ये मेरे गीतों के प्रमुख विषय हैं।
‘मन बावरा रे’, ‘नैना जोगी रे’, ‘अनहद सावन’, ‘बरखा रानी’, ‘मधुर पीड़ा’ और अनेक अन्य रचनाएँ इसी यात्रा के विभिन्न पड़ाव हैं। वर्तमान में मैं अपने सबसे महत्वाकांक्षी संगीत-प्रोजेक्ट ‘फ़कीर’ पर कार्य कर रहा हूँ—एक ऐसी श्रृंखला जो जीवन के गहरे प्रश्नों को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त करती है।
मेरे लिए गीत केवल धुनों पर रखे हुए शब्द नहीं हैं।
वे अनुभव हैं। वे संवाद हैं। वे आत्मा की भाषा हैं।
यदि मेरी किसी एक रचना से भी किसी व्यक्ति को आशा, शांति या अपने जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण मिलता है, तो मैं अपनी लेखनी को सार्थक मानता हूँ।
स्वागत है। यह केवल मेरे गीतों की दुनिया नहीं, बल्कि उन भावनाओं की दुनिया है जो हम सभी के भीतर कहीं न कहीं रहती हैं।
— Mukesh Mishra